व्यवस्था, राजनीती एवं मजदूर

भारत एक विकासशील राष्ट्र है यहाँ लगभग 70 प्रतिशत आबादी गावों ने बसती है| एकीसवी सदी के सुरुआती दौर में बहुत बड़ी आपदा सम्पूर्ण विश्व के सामने प्रकट हुई, वर्त्तमान की इस आपदा में सबसे ज्यादा कोई प्रभावित हुआ तो वह मजदूर वर्ग ही है उन मेसे वह मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ जो दैनिदीन कार्य कर अपना जीवकोपार्जन करता रहा है| मजदूर वर्ग सबसे अत्यधिक प्रभावित हुआ तो वह व्यवस्था ही है किसी भी लोकतंत्र में व्यवस्था समाज के लिए होती है किन्तु जब समाज व्यवस्था से प्रभावित होने लगे तो समाज में क्या चल रहा स्वम अविभूत होने लगता है व्यवस्था समाज का अभिन्न अंग होती है व्यवस्था का प्रमुख कार्य होता है कि वह समाज के सबसे निचले वर्ग कामकाजी वर्ग को ध्यान में रखकर निति निर्धारण का कार्य करे|  किन्तु व्यवस्था ऐसा नहीं करती है व्यवस्था केवल अपने हितों का ही ध्यान रखती है जिससे सरकारी योजनओं का लाभ जिस तबके को मिलना चाहिए उसे नहीं मिलता है| करोना महामारी के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला तबका गरीब समूह ही रहा है व्यवस्था इसी समूह को सुबिधाये प्रदान करने में विफल रहा है|  राजनीति ने सबसे ज्यादा ढुलमुल रवैया अपनाया है आपदा के समय राजनीति से जुड़े लोगो का कार्य ज्यादा होना चाहिए क्योकि समाज का यही तबका है जिसे आगे आकर समाज को मार्गदर्शित करने की जरुरत है किन्तु बिडम्बना यह रही है कि जब इस समूह की समाज को जरुरत रही है यह समूह घरो में दुबकर रह गया| मजदूर समाज का वह तबका होता है जो सबसे ज्यादा हाशिये पर है यह समूह हमेशा व्यवस्था एवं राजनीति से दुतकारा जाता है|